पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन
सन्दर्भ
- सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम के माध्यम से सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
परिचय
- पृष्ठभूमि: DPDP अधिनियम की धारा 44(3) ने RTI अधिनियम में संशोधन किया था, जिससे सार्वजनिक प्राधिकरणों को इस आधार पर सूचना देने से इनकार करने की सुविधा मिली कि मांगी गई जानकारी “व्यक्तिगत” प्रकृति की है।
- RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) व्यक्तिगत जानकारी के प्रकटीकरण से छूट से संबंधित है।
- पहले के प्रावधान में केवल व्यक्तिगत जानकारी की सीमित श्रेणियों को छूट दी गई थी और इसमें लोकहित परीक्षण को शामिल किया गया था।
- संशोधित प्रावधान व्यापक रूप से सभी व्यक्तिगत जानकारी को प्रकटीकरण से छूट देता है, जिससे संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत संरक्षित जानकारी तक पहुँच सीमित हो जाती है।
- सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रश्न: न्यायालय ने कहा कि DPDP अधिनियम और RTI अधिनियम दोनों केंद्रीय विधान हैं। इन दोनों के बीच वास्तविक रूप से सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता है।
- न्यायालय यह जाँच करेगा कि क्या DPDP अधिनियम के तहत डेटा साझा करने के प्रति यह प्रतिबंधात्मक या “सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण” पहले के पारदर्शिता संबंधी कानूनों को निरस्त करने के रूप में कार्य करता है।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का परिचय
- पृष्ठभूमि: 2017 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत के लिए डेटा संरक्षण ढाँचा विकसित करने हेतु न्यायमूर्ति बी. एन. श्रीकृष्ण समिति का गठन किया।
- दायरा: यह भारत के भीतर डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण पर लागू होता है, जहाँ ऐसा डेटा ऑनलाइन एकत्र किया जाता है या ऑफलाइन एकत्र करके उसे डिजिटलीकृत किया जाता है।
- यह भारत के बाहर किए जाने वाले ऐसे प्रसंस्करण पर भी लागू होता है, यदि वह भारत में वस्तुओं या सेवाओं की पेशकश के लिए किया जाता है।
- सहमति: व्यक्तिगत डेटा को किसी व्यक्ति की सहमति के आधार पर केवल वैध उद्देश्य के लिए ही संसाधित किया जा सकता है।
- कुछ निर्दिष्ट वैध उपयोगों के लिए सहमति आवश्यक नहीं हो सकती, जैसे व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा से डेटा साझा करना या परमिट, लाइसेंस, लाभ और सेवाओं के लिए राज्य द्वारा डेटा का प्रसंस्करण।
- डेटा न्यासी के दायित्व: डेटा की सटीकता बनाए रखना, डेटा को सुरक्षित रखना और उद्देश्य पूरा हो जाने के बाद डेटा को हटा देना।
- व्यक्तियों के अधिकार: जानकारी प्राप्त करने, सुधार और मिटाने का अनुरोध करने तथा शिकायत निवारण का अधिकार।
- छूट: राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और अपराधों की रोकथाम जैसे निर्दिष्ट आधारों के हित में सरकारी एजेंसियों को छूट दी जा सकती है।
- डेटा संरक्षण बोर्ड: अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन न करने के मामलों पर निर्णय देने के लिए। डेटा संरक्षण बोर्ड (DPB) के पास व्यक्तिगत डेटा के उल्लंघन संबंधी शिकायतों के लिए दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ हैं।
- बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति दो वर्ष के लिए की जाएगी और वे पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होंगे।
- केंद्र सरकार बोर्ड के सदस्यों की संख्या और चयन प्रक्रिया जैसे विवरण निर्धारित करेगी।
सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005
- उद्देश्य: इसे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, जिसके तहत नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया।
- दायरा: यह अधिनियम सार्वजनिक प्राधिकरणों पर लागू होता है, जिसमें सरकारी विभाग, मंत्रालय और सरकार द्वारा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित संगठन शामिल हैं।
- जनता के लिए उपलब्ध जानकारी: नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी मांगने का अधिकार है। इसमें अभिलेखों, दस्तावेजों और अन्य सूचनाओं तक पहुँच का अधिकार शामिल है।
- बहिष्करण: ऐसी जानकारी जो राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर सकती है, गोपनीयता का उल्लंघन कर सकती है या चल रही जाँच की निष्पक्षता को नुकसान पहुँचा सकती है।
- उत्तर देने की समय-सीमा: सार्वजनिक प्राधिकरणों को सूचना के अनुरोधों का उत्तर 30 दिनों के भीतर देना आवश्यक है। कुछ मामलों में इस अवधि को 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
- दंड: अधिनियम उन अधिकारियों के खिलाफ दंड का प्रावधान करता है जो उचित कारण के बिना सूचना रोकते हैं या गलत जानकारी प्रदान करते हैं।
अधिनियम का महत्व
- नागरिकों को सशक्त बनाता है: सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी प्राप्त करके सरकार में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
- सरकार को जवाबदेह बनाता है: सार्वजनिक प्राधिकरणों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह बनाने और भ्रष्टाचार को रोकने में सहायता करता है।
- RTI ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (NREGS) में धन के दुरुपयोग को उजागर करने में सहायता की।
- सुशासन को बढ़ावा देता है: यह सुनिश्चित करके लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करता है कि सरकार पारदर्शी तरीके से कार्य करे, जिससे जनता का विश्वास बढ़ता है।
- सामाजिक अंकेक्षण को सक्षम बनाता है: कार्यकर्ता और गैर-सरकारी संगठन (NGO) सरकारी योजनाओं और सेवाओं का सामाजिक अंकेक्षण करने के लिए RTI का उपयोग करते हैं।
- RTI का उपयोग यह जाँचने के लिए किया गया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत खाद्य राशन का सही तरीके से वितरण किया गया या नहीं।
- सार्वजनिक अभिलेखों तक पहुँच: RTI अनुरोधों का उपयोग सरकारी अनुबंधों का विवरण प्राप्त करने के लिए किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार या कार्यकुशलता की कमी उजागर हुई है।
- लोकतंत्र को मजबूत करता है: यह नागरिकों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का साधन प्रदान करता है, जिससे लोकतंत्र मजबूत होता है।
निष्कर्ष
- आरटीआई अधिनियम ने पारदर्शिता को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचार को कम करने और सरकारी संस्थानों को जवाबदेह बनाकर नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- यह सुशासन को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने का एक शक्तिशाली साधन है कि नागरिकों को अपने जीवन को प्रभावित करने वाली जानकारी तक पहुँच प्राप्त हो।
स्रोत: TH